बनी इस्राईल के में सूखा पड़ने का वाक्या

एक बार बनी इस्राईल के इलाक़े में भयंकर सूखा पड़ा (अकाल आया)। महीनों से बारिश नहीं हुई थी, जानवर और इंसान पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे थे और फ़सलें सूख चुकी थीं। बारिश के लिए दुआ करने के लिए हज़रत मूसा (अ.) अपनी क़ौम के हज़ारों लोगों (सहाबा और अवाम) को साथ लेकर मैदान में गए और

अल्लाह की बारगाह में हाथ उठाकर

बारिश के लिए रो-रोकर दुआ करने लगे। लेकिन काफ़ी देर दुआ करने के बाद भी आसमान पर बादल का एक टुकड़ा भी नज़र नहीं आया। हज़रत मूसा (अ.) ने अल्लाह से अर्ज़ किया, "ऐ रब्बुल आलमीन! हम तेरी बारगाह में दुआ कर रहे हैं, पर बारिश नहीं हो रही, इसकी क्या वजह है?

ग़ैबी आवाज़ और अल्लाह का हुक्म

अल्लाह तआला की जानिब से हज़रत मूसा (अ.) को ग़ैब से आवाज़ आई, ऐ मूसा! तुम्हारे इस मजमे (भीड़) में एक ऐसा शख़्स मौजूद है, जो पिछले 40 सालों से लगातार मेरे अहकामात (नियमों) की नाफ़रमानी (गुनाह) कर रहा है। उसने आज तक कभी तौबा नहीं की। उसी की बदक़िस्मती और गुनाहों की वजह से मैंने बारिश रोक रखी है। जब तक वह शख़्स इस मजमे से बाहर नहीं निकलेगा, मैं बारिश नहीं बरसाऊंगा। हज़रत मूसा (अ.) ने कहा, ऐ अल्लाह! मैं अकेले इतनी बड़ी भीड़ में उस एक शख़्स तक अपनी आवाज़ कैसे पहुँचाऊँ? अल्लाह ने फ़रमाया, ऐ मूसा! तुम्हारा काम सिर्फ़ आवाज़ लगाना है, उस तक पहुँचाना मेरा काम है।"

हज़रत मूसा (अ.) का ऐलान

हज़रत मूसा (अ.) ने मजमे के बीच खड़े होकर ज़ोर से ऐलान किया, ऐ अल्लाह के नाफ़रमान बंदे! जो पिछले 40 सालों से गुनाह कर रहा है, तू इसी वक़्त इस मजमे से बाहर निकल जा। तेरे एक के गुनाह की वजह से आज पूरी क़ौम प्यासी मर रही है और अल्लाह ने बारिश रोक रखी है। गुनहगार की तौबा और शर्मिंदगी वह गुनहगार शख़्स भीड़ के ठीक बीच में बैठा था। जैसे ही उसने हज़रत मूसा (अ.) का ऐलान सुना, वह काँप उठा। उसने चारों तरफ़ देखा कि कोई बाहर निकल रहा है या नहीं, लेकिन कोई नहीं उठा। वह समझ गया कि वह शख़्स वही है।

वह गहरे धर्मसंकट में पड़ गया:

अगर वह भीड़ से बाहर निकलता है, तो पूरी क़ौम के सामने वह हमेशा के लिए ज़लील (बदनाम) हो जाएगा। अगर वह बाहर नहीं निकलता, तो उसके कारण पूरी क़ौम प्यासी रह जाएगी। उसने शर्मिंदगी से अपना चेहरा चादर से ढँक लिया, उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। उसने सच्चे दिल से अपने दिल के अंदर ही अल्लाह से दुआ की:

"ऐ मेरे माबूद! ऐ अल्लाह!

मैंने 40 साल तक तेरी नाफ़रमानी की, फिर भी तूने मुझे रिज़्क़ दिया और मेरे गुनाहों को छुपाए रखा। आज मैं अपनी बदकारियों पर शर्मिंदा हूँ और सच्चे दिल से तुझसे तौबा करता हूँ। मुझे माफ़ कर दे और आज सबके सामने मुझे ज़लील होने से बचा ले। बिना किसी के निकले बारिश का बरसना अभी उस शख़्स ने दिल ही दिल में तौबा मुकम्मल की ही थी कि अचानक आसमान पर घने काले बादल छा गए और ज़ोरदार बारिश शुरू हो गई।

हज़रत मूसा (अ.) हैरान रह गए।

उन्होंने अल्लाह से अर्ज़ किया, "ऐ अल्लाह! इस मजमे से तो कोई भी शख़्स बाहर नहीं निकला, फिर यह रहमत की बारिश कैसे हो गई?" अल्लाह तआला ने फ़रमाया, "ऐ मूसा! जिस शख़्स की नाफ़रमानी की वजह से मैंने बारिश रोकी थी, आज उसकी तौबा और आंसुओं से ख़ुश होकर ही मैंने बारिश बरसाई है।" हज़रत मूसा (अ.) के दिल में उस बंदे से मिलने की चाहत हुई। उन्होंने कहा, "ऐ अल्लाह! मुझे उस प्यारे बंदे से मिलवा दे या उसका नाम बता दे।"

अल्लाह तआला ने फ़रमाया:

"ऐ मूसा! जब वह मेरा नाफ़रमान (गुनहगार) था, तब भी मैंने उसका नाम छुपाए रखा और उसे ज़लील होने से बचाया। अब तो वह तौबा करके मेरा महबूब (प्यारा) बंदा बन चुका है, तो अब मैं उसका नाम बताकर उसे कैसे ज़लील कर सकता हूँ!"

इस वाक़िये से मिलने वाला सीख

अल्लाह की रहमत बेइंतहा है: इंसान चाहे जितने भी गुनाह कर ले, अल्लाह हमेशा तौबा का दरवाज़ा खुला रखता है। गुनाह छुपाना अल्लाह की सिफ़त है: अल्लाह अपने बंदों के ऐबों को छुपाता है (सत्तारुल उयूब है)। सच्ची तौबा में ताक़त है: जब बंदा सच्चे दिल और शर्मिंदगी से रोकर तौबा करता है, तो क़ुदरत के फ़ैसले भी बदल दिए जाते हैं।



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